बोस संस्थान के वैज्ञानिकों ने क्वांटम नेटवर्क जोड़ने के लिए 'जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन' प्रस्तावित किया
विज्ञान मंत्रालय ने 6 अगस्त 2026 को बताया कि बोस संस्थान, कोलकाता के वैज्ञानिकों ने जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन (GCP) नामक प्रोटोकॉल प्रस्तावित किया है, जो कम प्रारंभिक उलझाव से लंबी दूरी के क्वांटम लिंक बना सकता है।
सारांश
विज्ञान मंत्रालय ने 6 अगस्त 2026 को बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान बोस संस्थान, कोलकाता के वैज्ञानिकों ने क्वांटम नेटवर्क जोड़ने के लिए जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन (GCP) नामक प्रोटोकॉल पेश किया है। फ़िज़िकल रिव्यू A में प्रकाशित यह कार्य क्वांटम यांत्रिकी को सांख्यिकीय भौतिकी के परकोलेशन सिद्धांत से जोड़ता है। GCP स्थानीय ज्यामितीय रूटिंग से बीच के स्टेशनों को अलग किए बिना कमज़ोर उलझे लिंक को मज़बूत करता है, जिससे कम प्रारंभिक उलझाव पर लंबी दूरी का क्वांटम संचार संभव होता है।
मुख्य तथ्य
- प्रोटोकॉल
- जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन (GCP)
- संस्थान
- बोस संस्थान, कोलकाता (DST)
- पत्रिका
- फ़िज़िकल रिव्यू A
- लाभ
- कम प्रारंभिक उलझाव पर लंबी दूरी के लिंक; नोड हटाने की ज़रूरत नहीं
अभ्यास MCQ 1 प्रश्न
2026 में बोस संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा क्वांटम नेटवर्क जोड़ने के लिए प्रस्तावित प्रोटोकॉल का नाम क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन
बोस संस्थान के वैज्ञानिकों ने जनरल कॉन्करेंस परकोलेशन (GCP) पेश किया, जो फ़िज़िकल रिव्यू A में प्रकाशित हुआ।