बॉयलर अधिनियम, 1923 की जगह लेने के लिए बॉयलर विधेयक, 2024 लोकसभा में पेश
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 25 मार्च 2025 को लोकसभा में बॉयलर विधेयक, 2024 पेश किया, जो सदी पुराने बॉयलर अधिनियम, 1923 को निरस्त करता है और इसके सात में से तीन अपराधों को अपराधमुक्त करता है।
सारांश
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 25 मार्च 2025 को लोकसभा में बॉयलर विधेयक, 2024 पेश किया। विधेयक बॉयलर अधिनियम, 1923 को निरस्त करता है और राज्यसभा इसे 4 दिसंबर 2024 को पारित कर चुकी थी। क़ानून के सात अपराधों में से जान-माल के नुक़सान वाले चार बड़े अपराधों के लिए आपराधिक दंड बरकरार है, जबकि बाकी तीन को वित्तीय दंड के साथ अपराधमुक्त किया गया है; सभी गैर-आपराधिक अपराधों में 'जुर्माना' अब अदालतों के बजाय कार्यकारी तंत्र से लगने वाला 'दंड' होगा। विधेयक प्रावधानों को छह अध्यायों में समूहित करता है, बॉयलर के अंदर काम करने वालों की सुरक्षा के प्रावधान जोड़ता है और क़ानून को जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2023 के अनुरूप बनाता है। 1923 के अधिनियम में 2007 में व्यापक संशोधन कर तृतीय पक्ष निरीक्षण शुरू किया गया था।
मुख्य तथ्य
- पेश
- 25 मार्च 2025, लोकसभा
- मंत्री
- पीयूष गोयल
- निरस्त
- बॉयलर अधिनियम, 1923
- राज्यसभा
- 4 दिसंबर 2024 को पारित
- अपराधमुक्त
- 7 में से 3 अपराध; 4 पर आपराधिक दंड बरकरार
- अनुरूप
- जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2023
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
25 मार्च 2025 को लोकसभा में पेश बॉयलर विधेयक, 2024 किस वर्ष के क़ानून को निरस्त करता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — 1923
बॉयलर विधेयक, 2024 बॉयलर अधिनियम, 1923 को निरस्त करता है।
मार्च 2025 में लोकसभा में पेश बॉयलर विधेयक, 2024 के तहत क़ानून के सात में से कितने अपराधों पर आपराधिक दंड बरकरार है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — चार
जान-माल के नुक़सान वाले चार बड़े अपराधों पर आपराधिक दंड बरकरार है; बाकी तीन अपराधमुक्त किए गए हैं।
25 मार्च 2025 को लोकसभा में पेश बॉयलर विधेयक, 2024 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्यसभा इस विधेयक को 4 दिसंबर 2024 को पहले ही पारित कर चुकी थी। 2. इसके अपराधमुक्ति प्रावधान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2023 के अनुरूप हैं। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
राज्यसभा ने विधेयक 4 दिसंबर 2024 को पारित किया था। समीक्षा में जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2023 के अनुरूप अपराधमुक्ति प्रावधान शामिल किए गए।