आयुष मंत्रालय और DBT ने टीबी में सहायक चिकित्सा के रूप में आयुर्वेद पर क्लिनिकल अध्ययन की घोषणा की
विश्व टीबी दिवस, 24 मार्च 2026 को आयुष मंत्रालय और जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में 'टीबी के लिए सहायक चिकित्सा के रूप में आयुर्वेद पर क्लिनिकल अध्ययन' की संयुक्त घोषणा की।
सारांश
विश्व क्षय रोग दिवस, 24 मार्च 2026 को आयुष मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने 'Clinical Study on Ayurveda as an Adjunct Therapy for Tuberculosis' नामक सहयोगात्मक क्लिनिकल अध्ययन की औपचारिक घोषणा की। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में यह संयुक्त घोषणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने की। अध्ययन का उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेद को आधुनिक टीबी-रोधी उपचार के साथ साक्ष्य-आधारित रूप से जोड़ना है।
मुख्य तथ्य
- अध्ययन
- टीबी के लिए सहायक चिकित्सा के रूप में आयुर्वेद पर क्लिनिकल अध्ययन
- साझेदार
- आयुष मंत्रालय और जैव प्रौद्योगिकी विभाग
- घोषणा
- 24 मार्च 2026 (विश्व टीबी दिवस), विज्ञान भवन
- द्वारा
- डॉ. जितेंद्र सिंह और प्रतापराव जाधव
- आयुर्वेद की भूमिका
- मानक टीबी-रोधी उपचार के साथ सहायक (add-on)
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
विश्व टीबी दिवस 2026 पर घोषित 'टीबी के लिए सहायक चिकित्सा के रूप में आयुर्वेद पर क्लिनिकल अध्ययन' आयुष मंत्रालय और किसके बीच सहयोग है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — जैव प्रौद्योगिकी विभाग
यह अध्ययन आयुष मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) का सहयोग है।
मार्च 2026 में घोषित आयुष–DBT टीबी अध्ययन में आयुर्वेद का परीक्षण किस रूप में हो रहा है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — टीबी-रोधी उपचार के साथ सहायक (add-on) के रूप में
अध्ययन आयुर्वेद को मानक टीबी-रोधी उपचार के साथ सहायक चिकित्सा के रूप में परखता है, विकल्प के रूप में नहीं।